अपनी जड़ें
Note फ़ॉर जुगनू; खूब घूमना चाहिए. यहां, वहां, सारे जहां में। नया शहर, नया कस्बा, नया देश सबको देखना चाहिए, खूब ही सारे नये लोगों से मिलना चाहिए, खूब ही सारी नयी बातें करनी चाहिए, दुनिया की दौड़ में सरपट भागो।
लेकिन बीच-बीच में थोड़ा रुकना भी चाहिए। अपनी जड़ों को थोड़ा रुककर टटोलना भी चाहिए।
उस नदी को याद करना जिसके किनारे बैठ कर तुमने अपने बचपन की कई शामें बितायी थी, उन दोस्तों को याद करना जिनके साथ आम के बगीचे में गर्म दुपहरें काटी थी, उन खेतों को याद रखना जिनमें कभी तुमने फसल बोयी थी,
उन तितलियों को याद रखना जिनके पीछे भागा करते थे, उस घास पर लेटना याद में रखना जहां लिखा था प्रेम में पहला खत, उन पगडंडियों को जिनसे होकर हर रोज तुम बाजार जाया करते थे,
उस स्कूल को याद रखना जहां पहली बार फुटबॉल खेलते हुए तुमने पैर तुड़वा ली थी, साईकिल से स्कूल जा रहे दिनों में किसी चाय दुकान पर पैसे चंदा कर दोस्तों के साथ की गयी पार्टी को याद रखना।
उन लोगों को याद रखना जिनकी ऊंगली पकड़ चलना सीखा था, उन्हें भी याद करना जिनकी साईकिल पर बैठ तुमने पहली बार गाँव की सरहद पार की थी, उस लोकल ट्रेन को जो तुम्हें हर महीने शहर पहुंचाया करती थी, उन यात्राओं में मिले लोगों के चेहरे को याद करने की कोशिश करना,
कभी-कभी उन्हें भी फोन कर लेना जिनके कंधे पर मेला देखने जाया करते थे, उस दोस्त को याद रखना जिसके साथ 'बडे़ होकर कुछ बनने' का सपना देखा करते थे, आज वह नहीं है, कभी उसे खोजने की कोशिश करना..
कि पूरी दुनिया घूमना खूबसूरत है, लेकिन जड़ों की तरफ लौटने से बड़ा सुख कुछ भी नहीं..

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