Tuesday, May 16, 2017

रुमानियत

तुम्हारे जिस्म और रूह के दरम्यान जो जगह है, मैं वहीँ अपना आशियाना बनाना चाहता हूं। शायद तुम्हे अंदाज़ा न हो पर ऐसी जगह है, क्योंकि एक ही वक़्त में मैंने जूनून और सुकून दोनों महसूस किया है। क्योंकि रौशनी की जरुरत नही मुझे, तुम्हारे जिस्म और रूह को देखने के लिए। मैं रहना चाहता हूं बिलकुल उनदोनो के बीचोबीच । ताकि तुम्हारे जिस्म और रूह दोनों से मेरी नज़दीकियां एक समान रह जाये। न जिस्म से थोड़ी ज्यादा न रूह से थोड़ी कम। ताकि एक वक़्त के बाद तुम्हारे जिस्म से होता हुआ , मैं घुल जाऊ तुम्हारी रूह में। ताकि जीने का कोई मलाल न रहे। ताकि मैं लिख सकूँ। ताकि तुम्हारी वो खुशबु जिसे सिर्फ मैं महसूस कर सका, हमेशा मुझे मदहोश करे। ताकि मैं अकेला न रहूं।
       मैं रूह में ही घुल जाना चाहता हूं क्योंकि रूहो को सज़ा नही मिलती मोहब्बत की। रूहो को जुदा नही किया जा सकता। क्योंकि हर कोई समा नही सकता तुम्हारी रूह में।
                    फिलवक्त उलझा हूँ मैं खुद के सवालो मे, पर जवाब जब भी मिला, पता जब भी मिला तुम्हारे जिस्म और रूह के बीच का। तो वही अपना आशियाना मैं बनाऊंगा। साथ जियूँगा और साथ हीं फ़ना हो जाऊंगा। तुम्हारी रूह में घुल जाऊंगा।
     #sufi
Gunjan ki KALAM se

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