Tuesday, May 30, 2017

मेरी दुनिया

वक़्त बेवक़्त, यूँ ही कभी, जब निराश, हताश और थक जाना इस दुनिया के नियम, कायदों या कुरीतियों से। तो मुझे बताना। मैं ले चलूंगा तुम्हे एक अलग दुनिया में। मेरी दुनिया में। हाँ, यहाँ से लोग नज़र नही आएंगे तुम्हे वहाँ। यहाँ सी व्यस्तता नज़र नही आयेगी तुम्हे वहाँ। चूंकि ये किसी आर्किटेक्ट की दुनिया नही है इसलिए इमारतों से इसकी खूबसूरती या भव्यता मत नापना। कोरे कागज पर बनी नीली स्याही की दुनिया है ये। पर रंग में मिलावट नही मिलेगी तुम्हे यहाँ।
                 मोहब्बत डालने की भी कोशिश की है मैंने नीली स्याही से। बस धोखे नही डाल सका। क्योंकि दूरियां या नज़दीकियां तो मुमकिन है मोहब्बत में पर धोखे केवल व्यापार में होते हैं, प्यार में नही।
                 एक गलती और हुई है मुझसे, मैंने प्यार की उम्र नही तय की है। मेरा अनुभव कहता है कि इसकी कोई उम्र नही होती। चाहे वो तीसरी में हो या 8वीं की सुधा हाे 12वी का सुमित हो या शादी के बाद की कशिश। सब प्रेम में हैं।
                 कलम थी मेरे पास, कागज़ के टुकड़े भी काफी थे। चाहता तो छोटा सा एक संविधान तो मैं भी लिख ही देता। पर न जाने क्यों किसी जीती जागती रूह के लिए कायदे कानून बनाना मुझे सही नही लगा। क्योंकि सपने मोहताज नही होते किसी और के । क्योंकि कायदे तो मैं खुद के लिए भी तय नही करता। क्योंकि कभी ये नही सुना मैंने किसी के पैदा होने पर की फलाने का बच्चा भारत में आ गया। अक्सर लोग कहते हैं कि फलाने का बच्चा दुनिया में सही सलामत आ गया। क्योंकि यही अंतिम सत्य है, कि तुम आज़ाद पैदा हुए थे।
                    दुनिया काफी बड़ी है मेरी, कभी सुकून से रूबरू कराऊंगा। ये जो बेनाम राब्ता है न, यही ले जायेगा हमे उस दुनिया में।
#To_be_continued
Gunjan ki KALAM se

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