Thursday, December 7, 2017

धर्मो के लिए आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट जाकर सोचने की जरूरत।

राजस्थान में हुई घटना, कोई हिंदू नहीं कर सकता। क्योंकि हिंदू तो शांतिप्रिय है।वह कट्टर कैसे हो सकता है? जरुर किसी मुसलमान ने हिंदुओं के नाम पर यह कत्लेआम फैलाया ,वीडियो बनाया और ज्वलंत मुद्दों का सहारा लेकर हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश की।

यह ठीक वैसे ही है जैसे आईएसआईएस ने दुनिया पर हिंसा थोपी है । यह ठीक वैसे ही है जैसे ISIS में कोई मुसलमान कत्लेआम नहीं फैलाता , जरूर वहां भी कोई हिंदू होता होगा। जो इस्लाम को बदनाम करने के लिए नकाब ओढ़कर कत्लेआम फैलाता है, और इस्लाम को बदनाम करता है । क्योंकि इस्लाम तो शांति का धर्म है ।

       तो असल में परेशानी कहां है ?जब इस्लाम और हिंदू दोनों ही शांति और अहिंसा के धर्म है तो धर्मों में यह कट्टरता कहां से फैल रही है ? जब एक ही धर्म के अलग-अलग लोग अलग-अलग विचारों से प्रेरित हैं ,तो फिर निश्चित तौर पर एक धर्म ने सभी को जोड़कर नहीं रखा है। लोगों की व्यक्तिगत वैचारिक क्षमता भी हमेशा से धर्म पर हावी रही है ।

               सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत ने अब तक दुनिया बचाए रखा है। नहीं तो धर्म ने कब का इसे अपने आगोश में भर लिया होता। और दुनिया कब की ख़त्म हो चुकी होती । धार्मिक चश्मे को हटाइए ।उस चश्मे के पीछे आप, सिर्फ आप हैं। जो ना किसी धर्म से है ना किसी पंत से , कोई गोरा हो सकता है, काला हो सकता है ।पर यह उसका भाग्य नहीं उसकी भौगोलिक परिस्थिती तय करती है, उसके आसपास का वातावरण तय करता है । आप अपने विचारों पर गहन चिंतन कीजिए। पढ़िए, अधिक से अधिक पढ़िए ,इतिहास पढ़िए ,पर पढ़िए । सुनी सुनाई बातों पर भरोसा नहीं कीजिए। क्योंकि एक मात्र सत्य है कि आप इंसान पैदा हुए थे , इंसान ही मरेंगे । प्राकृतिक रुप से पैदा हुए थे और प्रकृति में ही मिल जाएंगे । फिर चाहे आप मिट्टी में मिलें या आग में ,दोनों ही प्राकृतिक चीजे हैं।

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