सब ठीक जो जाएगा: कविता
सब ठीक हो जाएगा।(कविता)
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जब इमारते रंगीन हो रही हैं ,
और रिश्ते बेरंग हो रहे हैं,
जब अस्पतालों में किलकारियां ,
चीखों में तब्दील हो रही हैं,
जब हवा में खुशबू नहीं ,
डर फैल रहा है।
और रिश्ते बेरंग हो रहे हैं,
जब अस्पतालों में किलकारियां ,
चीखों में तब्दील हो रही हैं,
जब हवा में खुशबू नहीं ,
डर फैल रहा है।
तब भी एक उम्मीद कायम है,
इंसान के इंसान बने रहने की,
उम्मीद कायम है ।
इंसान के इंसान बने रहने की,
उम्मीद कायम है ।
माघ की सर्दी में ,
रेलवे स्टेशनों के बगल की झुग्गियां ,
जब मन विचलित करती हैं।
झुग्गियों के अंदर दम तोड़ रही उम्मीदें,
जब मन विचलित करती हैं।
रेलवे स्टेशनों के बगल की झुग्गियां ,
जब मन विचलित करती हैं।
झुग्गियों के अंदर दम तोड़ रही उम्मीदें,
जब मन विचलित करती हैं।
थाम लेता हूं बेचैन मन की डोर को,
क्योंकि यूं ही चुपचाप बैठा नहीं जाता।
हाथ पर हाथ धरे रहा नहीं जाता।
क्योंकि यूं ही चुपचाप बैठा नहीं जाता।
हाथ पर हाथ धरे रहा नहीं जाता।
जी करता है काट लूं ,
दुनिया से खुद को ।
जला दूं अखबारों को,
बुझा दूं समाचारों को ।
दुनिया से खुद को ।
जला दूं अखबारों को,
बुझा दूं समाचारों को ।
उदास मन लेकर,
बैठ जाता हूं घर के इक कोने में।
फिर पापा को गाजर का हलवा बनाते देख ,
लगता है सब ठीक हो जाएगा।।।
बैठ जाता हूं घर के इक कोने में।
फिर पापा को गाजर का हलवा बनाते देख ,
लगता है सब ठीक हो जाएगा।।।
Gunjan ki KALAM se


2 Comments:
बेशक !सब ठीक हो जायेगा..
बेशक !सब ठीक हो जायेगा..
गाजर का हलवा जरूर खाएंगे😊
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