शांति
"ध्वनि की अनुपस्थिति ही शांति है।"
पर मेरे ख्याल से शांति की अपनी परिभाषा होनी चाहिए। स्वयं में संपूर्ण ब्रह्मांड समेटे इस शब्द को परिभाषित करना कठिन जरूर है, पर असंभव नहीं। मैंने कोशिश की, पर कोई सटीक , एक पंक्ति की परिभाषा देने में असफल रहा ।
परिभाषा से इतर शांति के दो भेद हैं मुर्दा शांति और जिंदा शांति। दोनों ही एक दूसरे को विकर्षित करते हैं । यह आवश्यक नहीं कि दो लोगों के बीच की शांति सदैव जिंदा हो या सदैव मुर्दा हो। वक्त हालात और दूरियों के अनुसार यह परिवर्तित हो सकते हैं । और तो और एक व्यक्ति के मन मस्तिष्क के अंदर की शांति भी सदैव एक जैसी नहीं होती । मैं तो हर स्थान की शांति को विभाजित करता रहता हूं, कि आखिर यह जिंदा शांति है या मुर्दा शांति।
अक्सर कहा गया है की शांति को प्राप्त कर लेना ही अंतिम लक्ष्य है। पर मुझे यह वाक्य अधूरा लगता है।" जिंदा शांति को प्राप्त कर लेना ही अंतिम लक्ष्य है" पूरा वाक्य होना था।
अगर कोई आपको अकेले रहने से रोक रहा है तो उससे दूरी बनाइए। क्योंकि अकेले होना साथ होने जितना ही आवश्यक है। लोगों के साथ होने जितना ही अपने साथ होना भी आवश्यक है । अपने अंदर की मुर्दा शांति को खत्म कर जिंदा शांति भरने के लिए अकेले होना आवश्यक है । अकेले होना आवश्यक है क्योंकि दूसरों का होने से पहले खुद का होना आवश्यक है । दूसरों से प्रेम से पहले खुद से प्रेम होना आवश्यक है ।
जहां चिड़ियों की चुहल के बीच पहाड़ों की शांति जिंदा शांति है ,वही मानवनिर्मित पार्कों की शांति मुर्दा प्रतीत होती है। गाँव की शांति जहां ज़िंदा करती हैं वही, शहरो की शोर शराबे वाली शांति मुर्दा करती हैं।
हमे समझना होगा की चिंतन एवं मंथन दो अलग अलग चीज़े हैं। हमे मंथन करना होगा।
पर मेरे ख्याल से शांति की अपनी परिभाषा होनी चाहिए। स्वयं में संपूर्ण ब्रह्मांड समेटे इस शब्द को परिभाषित करना कठिन जरूर है, पर असंभव नहीं। मैंने कोशिश की, पर कोई सटीक , एक पंक्ति की परिभाषा देने में असफल रहा ।
परिभाषा से इतर शांति के दो भेद हैं मुर्दा शांति और जिंदा शांति। दोनों ही एक दूसरे को विकर्षित करते हैं । यह आवश्यक नहीं कि दो लोगों के बीच की शांति सदैव जिंदा हो या सदैव मुर्दा हो। वक्त हालात और दूरियों के अनुसार यह परिवर्तित हो सकते हैं । और तो और एक व्यक्ति के मन मस्तिष्क के अंदर की शांति भी सदैव एक जैसी नहीं होती । मैं तो हर स्थान की शांति को विभाजित करता रहता हूं, कि आखिर यह जिंदा शांति है या मुर्दा शांति।
अक्सर कहा गया है की शांति को प्राप्त कर लेना ही अंतिम लक्ष्य है। पर मुझे यह वाक्य अधूरा लगता है।" जिंदा शांति को प्राप्त कर लेना ही अंतिम लक्ष्य है" पूरा वाक्य होना था।
अगर कोई आपको अकेले रहने से रोक रहा है तो उससे दूरी बनाइए। क्योंकि अकेले होना साथ होने जितना ही आवश्यक है। लोगों के साथ होने जितना ही अपने साथ होना भी आवश्यक है । अपने अंदर की मुर्दा शांति को खत्म कर जिंदा शांति भरने के लिए अकेले होना आवश्यक है । अकेले होना आवश्यक है क्योंकि दूसरों का होने से पहले खुद का होना आवश्यक है । दूसरों से प्रेम से पहले खुद से प्रेम होना आवश्यक है ।
जहां चिड़ियों की चुहल के बीच पहाड़ों की शांति जिंदा शांति है ,वही मानवनिर्मित पार्कों की शांति मुर्दा प्रतीत होती है। गाँव की शांति जहां ज़िंदा करती हैं वही, शहरो की शोर शराबे वाली शांति मुर्दा करती हैं।
हमे समझना होगा की चिंतन एवं मंथन दो अलग अलग चीज़े हैं। हमे मंथन करना होगा।
मानव को जीवित रहने के लिए, ज़िंदा शांति प्राप्त करनी ही होगी।
Gunjan ki KALAM se


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