2जी प्रकरण पर आई राजा के लिए राहत।
#2g_scam
कोर्ट ,सीबीआई या फिर कोई और चाहे कुछ भी कह ले। पर मैं 2जी घोटाले को घोटाला समझता हूं। ठीक वैसे ही जैसे कोर्ट ,सीबीआई या फिर कोई और चाहे कुछ भी कह ले । गोधरा में मोदी की संलिप्तता और 84 के दंगों में राजीव गांधी की संलिप्तता मैं मानता हूं ।
पर यह बात सिर्फ किसी के दोषी या फिर किसी के निर्दोष साबित होने कि नहीं है। यह एक बहुत ही दूरगामी फैसला है । मेरे अनुसार यह एक सुनियोजित घटना है जिसका भारतीय राजनीति में भविष्य में एक अहम योगदान होगा।
2015 में जयललिता के मुख्यमंत्री बनने के बाद तमिलनाडु में उनकी योग्यता को देखते हुए, उनके नेतृत्व को देखते हुए यह अंदाजा लगाना बिल्कुल आसान था कि आगामी 15-20 सालो तक कोई और पार्टी तमिलनाडु में कभी वापसी नही कर पाएगी । पर जिस प्रकार तमिलनाडु की राजनीति में वक्त ने करवट बदली। पहले जयललिता का जेल जाना, फिर उनकी तबीयत खराब होना और फिर उनकी संदेहास्पद मृत्यु । इन घटनाक्रमों ने तमिलनाडु को सालों पीछे लाकर खड़ा कर दिया । वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की पार्टियों को पैर फैलाने के लिए चादर मिलती दिखाई देने लगी । वक्त बिल्कुल सटीक है जब एआईडीएमके अलग-अलग गुटों में बट चुका है । किसी खास व्यक्ति के नेतृत्व में कोई भी गुट आना नहीं चाहता। उस वक्त डीएमके के जैसी बड़ी विपक्ष की पार्टी के सामने उम्मीदों के दरवाजे खुल चुके हैं।
2015 में जयललिता के मुख्यमंत्री बनने के बाद तमिलनाडु में उनकी योग्यता को देखते हुए, उनके नेतृत्व को देखते हुए यह अंदाजा लगाना बिल्कुल आसान था कि आगामी 15-20 सालो तक कोई और पार्टी तमिलनाडु में कभी वापसी नही कर पाएगी । पर जिस प्रकार तमिलनाडु की राजनीति में वक्त ने करवट बदली। पहले जयललिता का जेल जाना, फिर उनकी तबीयत खराब होना और फिर उनकी संदेहास्पद मृत्यु । इन घटनाक्रमों ने तमिलनाडु को सालों पीछे लाकर खड़ा कर दिया । वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की पार्टियों को पैर फैलाने के लिए चादर मिलती दिखाई देने लगी । वक्त बिल्कुल सटीक है जब एआईडीएमके अलग-अलग गुटों में बट चुका है । किसी खास व्यक्ति के नेतृत्व में कोई भी गुट आना नहीं चाहता। उस वक्त डीएमके के जैसी बड़ी विपक्ष की पार्टी के सामने उम्मीदों के दरवाजे खुल चुके हैं।
इन्हीं घटनाक्रमों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में कोसो पीछे चल रही भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी जमीन तलाशनी शुरू की है। ए राजा और कनिमोझी यह दो ऐसे नाम है जो डीएमके में एक बड़ा रुतबा रखते हैं। ए राजा का बरी होना कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी और डीएमके के पहले मिलन जैसा लगता है। एक और जहां डीएमके से बात की जाएगी वहीं दूसरी ओर चुनावी गठबंधन पर पुरजोर चर्चा होगी अगर बात बन गई तो फिर यह कोर्ट का फैसला माना जाएगा। जहां पर यह राजा को बाइज्जत बरी किया गया। और अगर बात नहीं बनती है तो सरकार सीबीआई के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकती है। पर फिलहाल यह सभी पूर्वाभास है, इन पूर्वाग्रहों को कहां तक सत्यापित किया जाता है यह तो समय ही बताएगा। पर फिलहाल राजनीति इंजॉय कीजिए, क्योंकि सिद्धांत जैसा कुछ ढूंढने से भी नहीं मिलेगा इसमें।



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